Siddhamrit Surya-kriyayog
सिद्धामृत सूर्य–क्रियायोग


Siddhamrit Surya-kriyayogसिद्धामृत सूर्य–क्रियायोग

Author: Swami Buddhpuri Ji स्वामी बुद्धपुरी जी
Format: Paperback
Language: Hindi
ISBN: 9788178062303
Code: 9727D
Pages: 150
List Price: US$ 5.00
Price: US$ 4.00   You Save: US$ 1.00 (20.00%)

Publisher: Unicorn Books
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सूर्य के बिना हमारी पृथ्वी पर जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। सूर्य के जितने भी लाभ गिनाये जायें कम हैं, किन्तु सूर्यकिरणों के सेवन की सही विधि ज्ञात न होने के कारण सामान्यजन लाभ के स्थान पर हानि अधिक उठाते हैं। सूर्य–स्नान, सूर्यत्राटक, सूर्यनमस्कार, सूर्य अर्घ्य आदि अनेकानेक विधियाँ भी एक सीमा में ही लाभप्रद हैं।
सिद्धामृत सूर्य–क्रियायोग’एक ऐसी सरल, शास्त्रासम्मत तथा वैज्ञानिक विधि है, जिसके द्वारा सूर्य की अमृतरश्मियों का पान करते हुए केवल रोग और बुढ़ापा ही नहीं बल्कि भूख–प्यास जैसी सीमाओं को भी पार करना संभव है। गृहस्थ हो या संन्यासी, आस्तिक हो या नास्तिक, बच्चा हो या बूढ़ा, रोगी हो या योगी, यहाँ तक कि मृत्युशैय्या पर पड़ा व्यक्ति भी इस साधना से लाभ उठा सकता है। जो जहाँ पर है, उसको वहीं से आगे बढ़ने का मार्ग मिल जाता है। रोगी को स्वास्थ्य, विद्यार्थी को मस्तिष्क की तीक्ष्णता, गृहस्थ को वीर्यशक्ति और ऊर्जा तथा साधक को अन्तर्मुखता प्राप्त होती है। अब तक एक लाख से अधिक लोगों के जीवन में प्रविष्ट यह अनुभव–धारा अनवरत प्रगतिशील है।
आप भी विलक्षण सूर्य साधना की इस प्रथम पुस्तक को पढ़ें और लाभ उठायें।

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About the Author(s)

स्वामी बुद्ध (पुरी जी पूर्वाश्रम में IIT Delhi से M.Tech. की शिक्षा प्राप्त कर कुछ समय तक MNREC इलाहाबाद में अध्यापन कार्य करते रहे। अनेक वर्षों तक वेद–शास्त्रों तथा योगादि विषयक ग्रन्थों का अन्वेषण और तत्सम्बन्धी साधनों का प्रयोग करते रहे। हिमालय क्षेत्र में तपस्यापूर्वक महायोग का साक्षात् अनुभव करने के उपरान्त अब जनसामान्य के लिए उन गम्भीर रहस्यों को सरल रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
सिद्धामृत–सूर्य–क्रियायोग (सूर्य ऊर्जा से आरोग्य तथा शक्ति प्राप्त करने की साधना) अग्नि–क्रियायोग (अग्नि के सान्निध्य में रोग–निवारण तथा शक्ति जागरण की साधना), संजीवनी–क्रियायोग (शरीर में प्राण–ऊर्जा को नख से शिख तक भरने की शक्तिशाली साधना) आदि के रूप में उन्होंने अनेक महायोगीय साधनाओं का आविष्कार किया है। इनके बल पर वर्ष 2004 से वह स्वयं अन्न–जल–निद्रा तथा रोगादिकों पर विजय प्राप्त करके एकान्त साधना में रत हैं। प्राय: देश–विदेश के अनेक पत्र व पत्रिकाओं के अलावा निरोगधाम तथा वैद्यराज सदृश स्वास्थ्य पत्रिकाओं में भी स्वामी जी द्वारा आविष्कृत चमत्कारी साधनाओं के विषय में लेख छपते रहते हैं।

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