Desh-videsh Ke Jeev-jantuoan Ki Lok Kathayen - Vol. 1
देश-विदेश के जीव-जन्तुओं की कथाएं


Desh-videsh Ke Jeev-jantuoan Ki Lok Kathayen - Vol. 1देश-विदेश के जीव-जन्तुओं की कथाएं
Out of Stock

Author: Santhini Govindan सांथिनि गोविन्दन
Format: Paperback
Language: English
ISBN: 9788178060538
Code: 9230A
Pages: 24
Price: Rs. 36.00

Publisher: Unicorn Books
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पशु-पक्षी मानव जीवन के अभिन्न अंग हैं. तनिक विचार कीजिए यदि हमें चिड़ियों का चहचहाना, पपीहे की पीहू-पीहू और कोयल की कूक सुनने को न मिलती , मयूर का नृत्य, वन में विचरण करते मृग देखने को न मिलते, तो हमारा जीवन कितना नीरस होता. आपको यह जानकर शायद हंसी आए कि इन पशु-पक्षियों को लेकर मनुष्य ने कैसी-कैसी कल्पनाएं कीं. उदाहरण के लिए बाघों के शरीर पर काली धारियां कैसे बनीं? मगरमच्छ की पीठ खुरदरी क्यों होती है? कुत्ता अजनबियों को देखकर भोंकता क्यों है? आदि-आदि.
कालान्तर में यही कल्पनाएं लोक-कथाओं का धारण करती गईं. आज विश्व के अनेक देशों जैसे- भारत, वियतनाम, अफ्रीका, अमेरिका, फिलिस्तीन आदि में इन पशु-पक्षियों के विषय में अनेक प्रकार की लोककथाएं प्रचलित हैं. उन्हीं में से कुछ प्रमुख कथाएं चुनकर इस पुस्तक में समाहित की गई हैं.

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